Friday, December 17, 2021

क्या होता है कालसर्प दोष एवं कहा होती है इसकी पूजा ?

 क्या होता है कालसर्प दोष ? एवं कहा होती है इसकी पूजा ?

किसी जातक की कुंडली अनुसार देखा जाता है की कुंडली में राहु और केतु के बीच सारे  गृह आ जाते है तब  यह कालसर्प  दोष बनता  है तो इस दोष से मुक्ति के लिए पूजा करवानी पड़ती है !

जातक पर असर इस कालसर्प दोष का -  

1 - जातक का जीवन उतर चढ़ाव से भरा रहता है ,

2-  जीवन में कोई भी काम सफलता की और जाते जाते भी सफल नहीं हो पाना 

3- बिना वजह अपमानित होना 

4- शरीर में बार बार नए नए रोग उभर कर  आना 

5-  कालसर्पदोष के कारण घर में हमेशा तनाव पूर्ण माहौल बना रहना 

6- रात्रि में सपने में बार बार सर्प का दिखना रात में अचानक डरावने सपने आना 


पूजा स्थान - कालसर्प दोष से मुक्ति हेतु भारत में पूजा के लिए उज्जैन एवं नाशिक सर्वश्रेष्ठ स्थान माना  गया है  उसमे भी उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा के लिए विशेष माना गया है 


पूजा विधि - आप अगर जीवन में कालसर्प दोष से परेशान हो तो उज्जैन में किसी प्रसिद्ध पंडित से संपर्क करेके  कालसर्प दोष पूजा उज्जैन  kaalsarp dosh puja  ujjain  में   करवाकर इस दोष से मुक्ति पाए ! 


परिणाम - इस दोष से मुक्ति हेतु पूजन करवाकर जातक को कुछ हद तक उसको अपने जीवन में आराम मिल सकता है !




Friday, October 1, 2021

जानिये कैसे बनता कालसर्प दोष आपकी कुंडली में ?

 कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या श्राप के फलस्वरूप उसकी जन्म कुण्डली  मे परिलक्षित होता है!

व्यवहारिक रूप से पीडित व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान तो होता ही है! एवं  उसे संतान कष्ट का सामना करना पड़ता है!

वह जातक स्वयं को दुर्बल व रोगी तथा शत्रुओं के द्वारा पीडित भी रहता है!

कैसे बनता है कालसर्प योग - जब जातक की जन्म कुंडली मे सारे ग्रह राहु और केतु के बीच अवस्थित रूप से  रहते हैं तो उक्त कुण्डली मे कालसर्प दोष नामक योग निर्मित होता है! kaalsarp dosh puja ujjain 


ये कालसर्प योग मुख्यतः 12 प्रकार के होते हैं, जिसका प्रभाव जातक की गौचर मे निर्मित ग्रहों की यथावत स्थिति पर निर्भर करता है!कि जातक कों किस प्रकार का कालसर्प दोष बना हैसभी जातकों पर इसका एक समान प्रभाव नहीं पड़ता है!ये उस जातक की कुण्डली पर परस्पर ग्रहों की उच्च, निच,कारक,अकारक,अवस्था,अंशादि,पर प्रभावित करता है!कालसर्प दोष जितना कष्टदायक होता है उतना ही ऐश्वर्य दायक भी होता है

अगर आप भी इस दोष से परेशां हो तो सम्पर्क करे हमारे कालसर्प दोष पूजा विशेषज्ञ उज्जैन में पंडित जी से 

Tuesday, August 3, 2021

अगर आपकी कुंडली में भी कालसर्प दोष है तो इस नागपंचमी पर अवश्य कालसर्प दोष पूजा उज्जैन ( kaalsarp dosh puja ujjain ) में करवाए

 अगर आपकी कुंडली में भी कालसर्प दोष है तो इस नागपंचमी पर अवश्य कालसर्प दोष पूजा उज्जैन ( kaalsarp dosh puja ujjain ) में करवाए 

 उज्जैन तीर्थ अवंतिका तीर्थ महाँकाल मंदिर के अंतर्गत वैदिक पंडितो के तत्वाधान में संपन्न  होगा !

 जो श्रद्धालु भक्तगण इस अवसर पर आकर कालसर्प दोष शाँति पूजा उज्जैन kaalsarp dosh shanti puja ujjain में  कराना चाहते  हो तो आज ही

कॉल करे और पूजन का रजिस्टेशन प्राप्त करे 

सम्पर्क सूत्र 8989540544 

काल सर्प दोष के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी

कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या श्राप के फलस्वरूप उसकी जन्म कुण्डली  मे परिलक्षित होता है!

व्यवहारिक रूप से पीडित व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान तो होता ही है! एवं  उसे संतान कष्ट का सामना करना पड़ता है!

वह जातक स्वयं को दुर्बल व रोगी तथा शत्रुओं के द्वारा पीडित भी रहता है!

कैसे बनता है कालसर्प योग - जब जातक की जन्म कुंडली मे सारे ग्रह राहु और केतु के बीच अवस्थित रूप से  रहते हैं तो उक्त कुण्डली मे कालसर्प दोष नामक योग निर्मित होता है!

ये कालसर्प योग मुख्यतः 12 प्रकार के होते हैं, जिसका प्रभाव जातक की गौचर मे निर्मित ग्रहों की यथावत स्थिति पर निर्भर करता है!कि जातक कों किस प्रकार का कालसर्प दोष बना हैसभी जातकों पर इसका एक समान प्रभाव नहीं पड़ता है!ये उस जातक की कुण्डली पर परस्पर ग्रहों की उच्च, निच,कारक,अकारक,अवस्था,अंशादि,पर प्रभावित करता है!कालसर्प दोष जितना कष्टदायक होता है उतना ही ऐश्वर्य दायक भी होता है

Tuesday, June 29, 2021

उज्जैन मंगलनाथ मंदिर जहा पर की जाती है मंगलदोष पूजा उज्जैन कोरोना के पश्चात् इन नियमो के तहत की जाएगी पूजा पाठ एवं दर्शन

 उज्जैन मंगलनाथ मंदिर जहा पर की जाती है मंगलदोष पूजा उज्जैन कोरोना के पश्चात् इन नियमो के तहत की जाएगी पूजा पाठ एवं दर्शन 

1- वेक्सिनेशन प्रमाणपत्र होने के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया जायेगा 

2 - बिना मास्क मंदिर में प्रवेश वर्जित है !

3 - पूजा की अनुमति स्लॉट अनुसार सुबह 7 बजे से 9 बजे एवं 9 से 11 बजे इसी क्रम में दोपहर 3 बजे तक दी जावेगी !

4 - एक स्लॉट में केवल 10 पूजन ही  कराई जाएगी !

5- पहले रसीद अनुसार पूजा हेतु प्राथमिकता दी जावेगी 

6 - गर्भ गृह में 1 घंटे में 15 पूजन ही कराई जाएगी

7 - दर्शनार्थियों को दर्शन पूर्ववृत भर से कराये जायँगे !

8 - सभी पंडित पुजारी सामाजिक  दुरी का पालन करते हुए पूजा करवायंगे !

9 - सभी पुजारी पण्डितो को सेनेटाइजर का उपयो आवश्यक रूप से करना होगा 

अत: इन नियमो का पालन करने वाले व्यक्ति को ही मंदिर में प्रवेश दिया जायेगा  

Wednesday, April 14, 2021

क्या मांगलिक की शादी गैर मांगलिक से हो सकती है?

 मांगलिक दोष को लेकर या मांगलिक लड़की और लड़के की शीद को लेकर समाज में अन्धविश्वास फैला हुआ है,इसलिए लड़के और लड़की मागंलिक हो तो शादी उनके माता पिता के लिए एक प्रकार से परेशानी का कारण  बन जाती है

मांगलिक दोष को लेकर या मांगलिक लड़की और लड़के की शादी  को लेकर समाज में अन्धविश्वास फैला हुआ है,इसलिए लड़का  और लड़की मागंलिक हो तो शादी उनके माता पिता के लिए एक प्रकार से परेशानी का सबक बन जाती है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार लड़का और लड़की आगे मांगलिक हो तो यह ग्रहों की स्तिथि राहु और केतु तथा शनि की स्तिथि पर निर्भर करता  है की शादी मांगलिक है या गैर मांगलिक है!

लड़का मांगलिक   है तो उसकी किसी गैर मांगलिक लड़की से हो सकती है परन्तु राहु और केतु एवं शनि दूसरे चौथे सातवें आठवें एवं बाहर वें  भाव में बैठे हो, अगर राहु केतु और शनि इन भावो में नहीं हो तो उसकी शादी मांगलिक से नहीं हो सकती है!

मांगलिक दोष से निदान पाने के लिए जातक मंगल दोष पूजा  mangal dosh puja ujjan  भी कराते है ! मांगलिक दोष पूजा के लिए जातक उज्जैन में विशेष्ज्ञ पंडित के माध्यम से इस पूजा को सम्पन करवाते है 


Friday, April 9, 2021

कालसर्प दोष के राहत के सरलतम उपाय एवं मंत्र -

 यदि जन्म पत्रिका नहीं हो तथा जीवन में निम्नलिखित समस्याओं में से कोई एक भी हो तो वे अपने आपको #कालसर्प दोष से पीड़ित समझें तथा उपाय करें।   1. मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त    2. व्यवसाय में हानि बार-बार होना।   3. अपनों से ठगा जाना।    4. अकारण कलंकित होना।  

5-विवाह नहीं होना या वै‍वाहिक जीवन अस्त-व्यस्त होना।   6. बार-बार चोट-दुर्घटनाएं होना।     7. स्वास्थ्य खराब होना।    8.अच्‍छे किए गए कार्य का यश दूसरों को मिलना।     9.भयावह स्वप्न बार-बार आना, नाग-नागिन बार-बार दिखना।   10.काली स्त्री, जो भयावह हो या विधवा हो, रोते हुए दिखना।    11. गर्भपात होना या संतान होकर नहीं रहना आदि लक्षणों में से कोई एक भी हो  तो #कालसर्प दोष की शांति करवाएं।   नागपंचमी के दिन किए जाने वाले कुछ प्रयोग निम्नलिखित हैं जिनके करने  से कालसर्प दोष शिथिल होता है-

kaalsarp dosh puja ujjain


, Rudrabhishek puja ujjain 

1- नाग-नागिन का जोड़ा चांदी का बनवाकर पूजन कर जल में बहाएं।   


Thursday, March 25, 2021

समजिये इस ब्लॉग के माध्यम से कालसर्प दोष के बारे में विस्तृत जानकारी -:

 यह कालसर्प दोष जातक के जीवन में बहुत अधिक संघर्ष का कारण बनता है इसके कारण कहीं पर भी उन्नति एवं सफलता नहीं मिलती है चाहे वह परिवार हो या व्यवसाय हो.!

कालसर्प दोष की कहीं रूप है जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि किन भाव में या दोस्त बन रहा है इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि एक भी ग्रह अगर राहु और केतु से बाहर हुआ तो यह दोष नहीं बनता है  वहां पर कालसर्प दोष नहीं रहता है

कैसे करें कालसर्प दोष का निवारण =

अगर जातक में संपूर्ण भक्ति भाव का जब तक एवं साधना का संकल्प है तो यह उपाय सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं

अगर जातक के पास समय का अभाव है यश सशक्त भक्ति और समर्पण की कमी है तो फिर दान का महत्व है इसे काल भैरव के मंदिर में कुत्तों को खाना खिलाना शिव मंदिर में जल चढ़ाना ,गरीबों में कंबल बांटना इस तरह के दान से इस कालसर्प दोष का निवारण किया जा सकता है

यंत्र-तंत्र = कुछ लोगों का ज्यादा विश्वास है नेत्र में भी रहता है इसलिए यंत्र अंगूठी बनवाना इस प्रकार से भी अब कालसर्प दोष का निवारण कुछ हद तक कर सकते हैं

कालसर्प दोष पूजा के लिए विशेष स्थान -:

इस कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में  महत्वपूर्ण स्थान माना जाता  हैं यजमान यहां पर पंडित जी के माध्यम से विधि विधान से कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजा करवाते हैं उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करते हैं 

Monday, March 15, 2021

जानिए उज्जैन में कैसे मनाते बाबा महाकाल के साथ में होली का त्यौहार

हम सभी जानते है की दुनिया में मनाये जाने वाला महकाल के  त्यौहार की शुरुवात महाकाल बाबा की नगरी उज्जैन से ही होती है और बाबा महकाल से ही होती है और ये वर्षो की परम्परा है, उज्जैन में बाबा महकाल में होली का उत्सव मनाया जाता  है इसमें राजा धी राज महकाल बाबा स्वयं होली खेलते है

कहने का तात्पर्य यह है की होली की संध्या के दिन मंदिर के पण्डे पुजारी और यह पर होली खेलते है इस दर्शनार्थियों की भारी भीड़ यह पर देखने को मिलती है
भक्त  अबीर गुलाल से एक दूसरे को रंग लगाते है उसके बाद आरती होती है तत्पश्चात होलिका दहन होता है
आरती के बाद यहां होलिका दहन किया गया जाता है और भक्त बाबा के भजनों में झूमते नजर आते हैं।


महकाल बाबा के यहा पर एक दिन पहले होली मनाने कि शुरुवात हो जाती है यह पर परम्परा के अनुसार संध्या आरती में ही महाकाल राजा को रंग लगाया जाता है वह के पुजारी अबीर गुलाल से खूब रंग लगा कर मग्न हो जाते है आरती भी विशेष प्रकार के मंत्रोचरण के साथ  होती है ततपशचात हलिका दहन होती है आरती के समय भी बाबा के भक्तो पर होली का खूब रंग चढ़ता है

भजन संध्या - इसके बाद फिर महाकाल बाबा के यह पर भजन संध्या का आयोजन भी किया जाता है जिसमे भक्त खूब झूमते नाचते गाते भी है खूब एक दूसरे को रंग लगाते है
होली के महापर्व को मनाने के लिए विदेशों से भी खूब दर्शनार्थी आते है और खूब धूमधाम से इस त्यौहार को मनाते है यह प्रथा महाकाल मंदिर में बहुत पुराने समय से चली आ  रही है

Friday, March 12, 2021

समजिये मंगल दोष के बारे में विशेष तरह की जानकारी आखिर क्या है मांगलिक दोष का निवारण -

मंगल  दोष - 

जब किसी जातक या जातिका की कुंडली में मंगल किसी विशेष भावो मे  जुड़े हो या उस पर किसी तरह का नकारातमक प्रभाव डाल रहे हो तो ऐसे जातक या जातिका मंगल दोष से प्रभावित होगा 

और इस मंगल दोष का प्रभाव जातक के विवाहिक जीवन में ही सबसे ज्यादा पड़ता है विवाह में रूकावट आना वैवाहिक जीवन शांतिपूर्ण तरीके से नहीं चलना आदि!

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल भगवान जो है हमारे रिश्तो पर दिमाग पर अधिपत्य हो जाते है  

होता क्या है मांगलिक दोष - पत्रिका के लगन भाव में या सप्तम भाव में चतुर्थ भाव में अष्टम भाव में या द्वादश भाव में स्तिथ हो तो कुंडली में मंगल दोष होता है 


इस मांगलिक दोष के प्रभाव - 

लग्न भाव में अगर मंगल है तो उस जातक का स्वाभाव क्रोधी स्वाभाव का रहता है 

चतुर्थ भाव में जब मंगल हो तो जातक के जीवन में दुख बहुत रहते है एवं परिवार में शांति नहीं रहती है 

अगर किसी जातक के सप्तम भाव में मंगल है तो उस जातक को वैवाहिक संबंध बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है 

अष्टम भाव में मंगल स्तिथ रहने से विवाहीक जीवन में परेशानी आती है एवं इसमें जातक के ससुराल तरफ से संबंध बिगड़ते   है 

द्वादश भाव में मंगल होने पर जातक या उनके परिवार में बार बार किसी न किसी का बीमार होते रहना है आयु क्षीण होना आदि 

निष्कर्ष - शास्त्र किसी भी दोष को स्पष्ट रूप से बताने में सक्षम में कुछ जैसे मंगल दोष पूजा  अथवा दान आदि से कुछ संभव  भी है पर यह कहना बिलकुल अनुचित होगा की किसी दोष को आप को पूर्णता समाप्त हो जाये! यदि कोई जातक मांगलिक है तो यह जरूर कर सकते है की उसकी शादी किसी मांगलिक से ही करवा कर इस दोष को आप कम कर सकते हो यही एक इस तरह का मुख्य उदेश्य है 


Monday, March 8, 2021

क्यों है विशेष महत्व उज्जैन महाकाल में शिवरात्रि के दिन कालसर्प दोष पूजा एवं मंगल दोष पूजा का ?

अगर उज्जैन में आप शिवरात्रि के दिन जा रहे हो या इस दिन पूजन अनुष्ठान क्र रहे हो तो यह अपने आप में पुण्य फल मिलने वाली बात है 

क्यूंकि शास्त्रों के अनुसार यह कहा गया है की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना  गया है 

1. क्षिप्रा नदी = सभी ज्योतिर्लिंग में भी ये इसलिए भी सर्वश्रेष्ठ है क्यूंकि ये माँ शिप्रा नदी के किनारे स्तिथ है इसी नदी पर ही हर बार १२ साल में लगने वाले सिंहस्थ का आयोजन होता है 

2. भस्मारती = सारे ज्योतिर्लिंग में से ये एक ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहा सुबह की आरती मुर्दो की भस्म से ही होती है

कालसर्प दोष पूजा = आप सब जानते हो की कालसर्प दोष की पूजा घर में सुख शांति नहीं होना, या रात को डरावने सपने आना इन सब के कारणों से जातक की कुंडली में भी कालसर्प दोष निकल जाता है जिससे इसके निदान हेतु से जातक कालसर्प दोष की पूजा उज्जैन करवाते है 

इससे तात्पर्य है की इस दिन महाशिवरात्रि के दिन इस पूजा को करने से विशेष लाभ मिलता है अतः कालसर्प दोष पूजा जिस भी जातक को करवान रहता है उसके लिए ये साल का सर्वश्रेष्ठ मुहरत होता है 

मंगल दोष पूजा उज्जैन = जिस भी जातक की कुंडली में मंगल का दोष हो तो उसको उज्जैन में आकर पूजा करना पड़ती है तभी इस दोष से मुक्ति मिल पाती  है वैसे तो मंगल दोष पूजा के लिए उज्जैन में मंगल नाथ का मंदिर है जहा पर ही इसकी पूजा होती है और आप कभी भी इस पूजा को साल में करा सकते हो 

परन्तु कहा  गया है  शिवरात्रि वाले महादिन इसकी पूजा करवाने से विशेष पुण्य फल मिलता है एवं तुरंत इसका पुण्य लाभ व्यक्ति को मिलता है 

शिवरुद्राभिषेक = इस दिन  के लिए शास्त्रों के अनुसार ऐसा भी कहा गया है की इस पूजा का विशेष लाभ मिलता है क्यूंकि आप भी जानते है रुद्राभिषेक जो होता है वह शिव जी के शिवलिंग पर रूद्र मंत्रो के माध्यम से होता है 

इसीलिए शिवरात्रि के दिन उज्जैन में आइये और करवाइये ये पुजाये और पाइये इन सब दोषो से मुक्ती 

#shivratripuja 

#mahakaldarshanshivratri 

#shivatridarshan

Tuesday, March 2, 2021

जानिए कुंडली में कैसे बनता हे पंच महापुरुष योग ??

 इस योग से व्यक्ति को हर प्रकार से सुख , समृद्धि , यश  और मान सम्मान की प्राप्ति होती हे  |

1 ) शश योग - यह योग शनि देव द्वारा निर्मित होता हे  यदि कुंडली में शनि देव अपनी उच्च राशि तुला या अपनी ही राशि कुम्भ या मकर में हो और इसी के साथ केंद्र में स्थापित हो तो इस योग का निर्माण होता हे |  इस राजयोग से व्यक्ति सरकरी नौकरी या उच्च पद की प्राप्ति करता हे  |

2 ) रुचक योग - यह योग मंगल के द्वारा निर्मित होता  हे  यदि कुंडली  में मंगल देव अपनी उच्च राशि मकर में या अपनी ही राशि मेष या वृश्चिक में  हो और इसी के साथ केंद्र ( 1 ,4  ,7 ,10 ) में स्थापित हो तो रुचक योग का निर्माण होता हे। इस योग के बनने से व्यक्ति पराक्रमी और बलशाली बनता हे व्यक्ति हर वक़्त ऊर्जावान  महसूसकरता हे

3 ) भद्र योग - यह योग बुध देव के द्वारा निर्मित होता हे यदि कुंडली में बुध देव अपनी ही राशि मिथुन या कन्या में हो और साथ ही केंद्र में स्थापित हो तब भद्र योग का निर्माण होता हे इस योग के द्वारा जातक अपनी बुद्धि से बड़े से बड़े काम आसानी से कर लेता हे जातक बहुत बुद्धिमान होता हे  |

4 ) हंस योग - यह यह गुरु देव के द्वारा निर्मित होता हे यदि कुंडली में गुरु देव अपनी राशि धनु य मीन में हो या अपनी उच्च की राशि कर्क में स्थापित हो इसी के साथ केंद्र में (1 ,4 ,7 ,10  ) में बैठे हो तब हंस योग का निर्माण होता हे  |इस योग में जन्मे जातक शिक्षा के क्षेत्र में काफी आगे जाते हे ऐसे जातक काफी ज्ञानी होते हे  |

5 ) मालव्य योग - यह योग शुक्र देव के द्वारा निर्मित होता हे यदि कुंडली में शुक्र अपनी राशि तुला या वृषभ में हो या अपनी उच्च राशि मीन में हो इसी के साथ केंद्र में (१,४,७,१०) में स्थापित हो तब मालव्य योग का निर्माण होता हे इस योग में जन्मे जातक सूंदर और आकर्षण प्रिय होते हे ऐसे जातक ग्लेमर वाले क्षेत्र में उचाईया पाते हे 

अगर आप भी इस तरह किसी दोष से परेशांन  हो तो संपर्क करिये हमारे कालसर्प दो एवं मंगल दोष पूजा उज्जैन  विशेषज्ञ से 

Wednesday, February 24, 2021

जानिए कैसे बनता कालसर्प दोष और इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी -

 किसी जातक की जन्मकुंडली में जब राहु और केतु के मध्य में सभी गृह आ जाते है ऐसी स्तिथि में कालसर्प दोष का निर्माण होता है.कालसर्प दोष भी 12 प्रकार के होते है!

यह हर बार  अलग अलग भावो में बनते है उसके कारण इनका प्रभाव भी अलग अलग रहता है, यह कालसर्प दोष जिसकी भी कुंडली में होता है उस जातक का जीवन बहुत ही कष्टमय होता है, उसके कोई भी कार्य आसान नहीं होते है कही कार्य तो ऐसे भी  रहते है की होते होते भी  रह जाते है कालसर्प दोष से पीड़ित  जातक अपने परिवार रिश्तेदार एवं सामाजिक जीवन में संकट पूर्ण जीवन जीता है!

कब कराये इस दोष की पूजा :- वैसे उज्जैन और नाशिक में तो इसकी पूजा कभी भी करा सकते है, फिर भी इसकी पूजा के विशेष दिन रहते है! अगर उस दिन कराये तो विशेष लाभ मिलता है 

1-  मासशिवरात्रि :- हर माह की त्रियोदशी को कृष्णपक्ष में आने वाली इस दिन मास शिवरात्रि मनाई जाती है , इस दिन भी kaalsarp dosh puja ujjain  कराई जा सकती है यह दिन शिव् जी को समर्पित होने के कारण यह बहुत ही विशेष माना जाता है, इसकी पूजा से तुरंत ही फल मिलता है 

 2 - अमावस्या तिथि :- इस पूजा का सर्वश्रेष्ठ अगर तिथि से पूजा करवाना है तो माह महीने की अमावस्या ,श्रावण अमावस्या, और अश्विन अमावस्या, इन दिनों का विशेष महत्व रहता है और इन सब में भी अगरदि सोमवती या शनैश्चरी अमावस्या आ जाये तो और विशेष सहयोग हो जाता है

कभी कभी जैसे वैशाख हो और शनैश्चरी अमावस्या जैसे हो गयी तो बहुत ही शुभ अवसर हो जाता है 

3 -पितृ पक्ष- पितृ पक्ष में भी आप किसी भी दिन कालसर्प दोष की पूजा करवा सकते हो कालसर्प दोष की शांति की पूजा के लिए ये दिन भी बहुत खास माने  गए है 

अगर आप भी कालसर्प दोष पूजा kaalsarp dosh puja ujjain करवाने चाहते हो तो उज्जैन या नाशिक किसी भी जगह तो सम्पर्क करिये हमारे पूजा विशेषज्ञ से 

कॉल नाउ- 8989540544 

Friday, February 5, 2021

पढ़िए ये ब्लॉग और जानिए सम्पूर्ण जानकारी की क्या है #कालसर्प दोष?

 जानिए इन में से कुछ भी बाते अगर आप के जीवन में हो रही हो तो तुरंत सम्पर्क करिये पूजा विशेषज्ञ से। .. 

यदि आपके पास में जन्मपत्रिका नहीं है निम्नलिखित समस्याओं में से कोई एक भी हो खुद समज लीजिये की आप कालसर्प दोष से पीड़ित है 

1.मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता :- अगर आप खूब मेहनत करते है उसके बाद भी आगे आपको उसका पूर्ण फल नहीं मिलता हो,और निराशा ही हाथ लगती हो तब बी आप मान सकते हो की या इस कालसर्प दोष की वजह से  आपके जीवन में परेशानी आ रही है !

2. व्यवसाय में हानि बार-बार होना।- अगर आप किसी बी प्रकार के व्यवसाय में खर्च करे उसके बाद बी आपको लगातार आपको  हानि ही हानि होये ,खूब म्हणत के बाद बी पूर्ण लाभ न मिल पाए तो समझ ले किस आपको कालसर्प दोष से पीड़ित हो !

3 . अकारण कलंकित होना।:- आपके जीवन में बिना वजह ही यश या मान सम्मान में हानि हो रही हो ,बिना दोष के समाज में कलंकित होना पड रहा हो 

4 . संतान नहीं होना या संतान की उन्नति नहीं होना-:-अगर आपको संतान प्रापति में बी बाधा आ रही हो तो बी आपको कालसर्प दोष पूजा करा लेना  चाहिए 

5 . विवाह नहीं होना या वै‍वाहिक जीवन अस्त-व्यस्त होना :- विवाह के योग नहीं बनना विवाह होने में अड़चने आना ये भी एक महत्व पूर्ण  बिंदु है 

6 . स्वास्थ्य खराब होना।- बार बार अकारण आपको स्वस्थ ख़राब हो जान परिवार में कोई न कोई हर टाइम होते रहना यह भी महत्व पूर्ण है 

7  भयावह स्वप्न बार-बार आना:- बार बार भयावह  सपने आना, रात में अचानक जाग कर उठ जाना, सपने में नाग-नागिन बार-बार दिखना।नाग नागिन का दिखना बहुत ही भयानक माना जाता है ,ऐसा अगर हो रहा हो तो निश्चित ही कालसर्प दोष माना जाता है.!

8  . काली स्त्री, जो भयावह हो या विधवा हो, रोते हुए दिखना इस तरह का रात में दिखना या बार बार दिखना !

यदि आपके पास में जन्मपत्रिका नहीं है निम्नलिखित समस्याओं में से कोई एक भी हो खुद समज लीजिये की आप कालसर्प दोष से पीड़ित है 

अत:संपर्क करिये हमारे कालसर्प दोष नाशिक पूजा विशेषज्ञ से। .........

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Tuesday, February 2, 2021

समझिये हम किस स्तिथि में मान सकते है की जातक का यह दोष मांगलिक दोष है या मांगलिक दोष से पीड़ित है ?

समझिये हम किस स्तिथि में मान सकते है की जातक का यह दोष मांगलिक दोष है या मांगलिक दोष से पीड़ित है ? 
जब जातक के जन्म के अनुसार बनी कुंडली में जातक के 12 ,9 ,7 ,1 ,4 उसके स्थान में या भाव में मंगल स्थित हो तो हम उस जातक या व्यक्ति मांगलिक मानते है :- जो मांगलिक लोग रहते है उनकी कुछ खास विशेषता भी रहती है :-
 1 -मांगलिक जातक का एक सर्वश्रेष्ठ गुण यह होता है की वह कठिन से कठिन कार्य बिना विलम्ब करे निर्धारित समय से पूर्व ही कर लेते हैं, 
 2 -मांगलिक के जातको में जन्मजात से ही नेतृत्व की क्षमता होती है,इन लोगो की खासियत यह भी रहती हैकी ये लोग जलदी किसी से जान पहचान नहीं बनाते है और अगर जान पहचान बनाते है तो उसको पूर्णतः निभाते भी है 3 - महत्वकांश अधिक होने के कारण ये स्वाभाव से थोड़े क्रोधित होते है ,परन्तु इनको दया भी जल्दी आ जाती है यह बहुत दयालु, क्ष तथा मानवतावादी होते हैं, 
4-- गलत बात का समर्थन करना एवं गलत व्यक्ति के आगे झुकना इनको पसंद नहीं होता और खुद भी गलती नहीं करते।
 5- मांगलिक जातक जो रहते है ये प्रतिष्ठा में भी उच्चपदो पर रहते है ,अभिभावक, राजनीतिज्ञ, डॉक्टर,इंजीनियर सभी क्षेत्रों में विशेष योग्यता प्राप्त करते हैं। #मंगलदोषपूजाउज्जैन

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