Sunday, June 28, 2020

जानिये किस तरह से सोचते है लोग मंगल दोष के बारे में ?


मांगलिक मिथक:-
यदि आप मंगलवार को पैदा हुए हैं तो आप पक्का मांगलिक हैं । यह बिल्कुल सच नहीं हे ।मांगलिक मिथकमांगलिक और अमांगलिक का तलक निश्चित हे। किसी भी शादी की उम्र दोनो लोगों के विचारों के मेल-जोल और समझदारी पे निर्भर करती हे ।

किस तरह का होते है मांगलिक व्यक्ति:-
  मांगलिक व्यक्ति विनम्र, निर्भय, प्रभावशाली, होशियार, केंद्रित, अनुशासित पर गुस्सैल होते हैं । उनमैं से जो वाइब्रेशन्स उत्पन्न होती हैं वे बहुत शक्तिमान एवं तेजस्वी होती हैं । इसी कारण ऐसा माना जाता हे की सिर्फ एक मांगलिक ही दूसरे मांगलिक की प्रकृति के साथ शांतिपूर्वक निभा सकता हे । एक और विचारधारा जो हमारे समाज मैं प्रचलित हे वह ये हे की 28 साल की उम्र के बाद मंगल का दोष कम हो जाता हे ।
इतिहास और मांगलिक प्रचलन
हमारे किसी पोराणिक ग्रंथ मैं मांगलिक दोष के बारे मैं नहीं कहा गया । कहीं भी महाभारत, रामायण या पुराण मैं यह सामने नहीं आया की विवाह पूर्व कुंडली या ग्रह मिलाये जाते थे । उनके हिसाब से यह एक नया विचार हे 

कुछ और प्रसिद्ध दोष निवारण उपाय हैं - केसरिया गणपति की पूजा, लाल कपड़े का दान, पीपल के पेड़ की दूध से पूजा और घर पे हाथी दान्त रखना । 
मांगलिक दोष और हम
मांगलिक दोष सिर्फ जनमकुंडली के 5 घरों मैं मंगल की उपस्तिथि के बारे मैं नहीं हैं । खुले दिमाग से, समझदारी से, तर्क-वितर्क करके सोचैं या किसी सुशिक्षित वयक्ति से परामर्श करैं। डर कर अंधविश्वास के कुएँ मैं ना कूदें !
  अगर आप भी इन सब समस्याओं से ग्रसित हैं तो तुरंत संपर्क करें हमारे  मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ पंडित जी से  


Wednesday, June 24, 2020

जानिए सर्वप्रथम मांगलिक दोष किसे कहते हैं  ???

इस बात पर हम पाठकों का ध्यान आकृष्ट करना चाहेंगे। सामान्यतः किसी भी जातक की जन्मपत्रिका में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में से किसी भी एक भाव में मंगल का स्थित होना मांगलिक दोष कहलाता है। 

लग्ने व्यये पाताले जामित्रे चाष्टमे कुजे।
कन्याभर्तुविनाशः स्याद्भर्तुभार्याविनाशनम्‌॥
कुछ विद्वान इस दोष को तीनों लग्न अर्थात्‌ लग्न के अतिरिक्त चंद्र लग्न, सूर्य लग्न एवं शुक्र से भी देखते हैं। शास्त्रोक्त मान्यता है कि मांगलिक दोष वाले वर अथवा कन्या का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले जातक से ही होना आवश्यक है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य,शनि और राहु को अलगाववादी ग्रह एवं मंगल को मारणात्मक प्रभाव वाला ग्रह माना गया है। अतः लग्न, चर्तुथ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में स्थित होकर मंगल जीवनसाथी की आयु की हानि करता है। यहां हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि केवल मांगलिक दोष के होने मात्र से ही यहां जीवनसाथी की मृत्यु या दाम्पत्य सुख का अभाव कहना सही नहीं है अपितु जन्मपत्रिका के अन्य शुभाशुभ योगों के समेकित अध्ययन से ही किसी निर्णय पर पहुंचना श्रेयस्कर है किंतु ऐसा भी नहीं है कि यह दोष बिल्कुल ही निष्प्रभावी होता है।

जन्मपत्रिका में ऐसी अनेक स्थितियां है जो मंगल दोष पूजा मंगल दोष पूजाके प्रभाव को कम करने अथवा उसका परिहार करने में सक्षम हैं।

                                   mangal dosh puja ujjain
 इनमें से कुछ योगों के बारे में हम यहां उल्लेख कर 
रहे हैं।
1. यदि किसी वर-कन्या की जन्मपत्रिका में लग्न,चर्तुथ,सप्तम,अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि,राहु,केतु आदि स्थित हों तो मांगलिक दोष उज्जैन का परिहार हो जाता है।
2. यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी होता है।

3. यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चर्तुथ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तब भी मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

4. यदि मंगल अष्टम भाव में अपनी नीचरशि में कर्क में स्थित हो अथवा धनु राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है।
5. यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सिंह,कर्क,धनु,मीन आदि में स्थित हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

6. यदि वर-कन्या की जन्मपत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगलदोष मान्य नहीं होता है।

Saturday, June 20, 2020

जानिए क्या है मांगलिक मिथक और मंगल दोष के उपाय ?



मांगलिक मिथक
यदि आप मंगलवार को पैदा हुए हैं तो आप पक्का मांगलिक हैं । यह बिल्कुल सच नहीं हे ।मांगलिक मिथकमांगलिक और अमांगलिक का तलक निश्चित हे। किसी भी शादी की उम्र दोनो लोगों के विचारों के मेल-जोल और समझदारी पे निर्भर करती हे ।  

मांगलिक दोष के उपाय
कुछ और प्रसिद्ध दोष मांगलिक निवारण उपाय हैं - केसरिया गणपति की पूजा, लाल कपड़े का दान, पीपल के पेड़ की दूध से पूजा और घर पे हाथी दान्त रखना ।  
मांगलिक दोष और हम
मांगलिक दोष सिर्फ जनमकुंडली के 5 घरों मैं मंगल की उपस्तिथि के बारे मैं नहीं हैं । खुले दिमाग से, समझदारी से, तर्क-वितर्क करके सोचैं या किसी सुशिक्षित वयक्ति से परामर्श करैं। डर कर अंधविश्वास के कुएँ मैं ना कूदें !
और अधिक जानकारी के लिए करिए यहाँ पर क्लिक जानिए मंगल दोष के बारे अधिक जानकारी
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Wednesday, June 10, 2020

मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के उपाय

1. यदि किसी वर-कन्या की जन्मपत्रिका में लग्न,चर्तुथ,सप्तम,अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि,राहु,केतु आदि स्थित हों तो मांगलिक दोष का परिहार हो जाता है।
2. यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी होता है।

   3. यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चर्तुथ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तब भी मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।



4. यदि मंगल अष्टम भाव में अपनी नीचरशि में कर्क में स्थित हो अथवा धनु राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है।
5. यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सिंह,कर्क,धनु,मीन आदि में स्थित हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

6. यदि वर-कन्या की जन्मपत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगलदोष मान्य नहीं होता है।अगर आप बी इस तरह की परेशानी से परेशान है तो सम्पर्क करिये हमारे मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ से

Wednesday, June 3, 2020

जानिए क्या है कालसर्प दोष पूजा है 


प्रत्येक जातक की कुंडली को राहु और केतु 180 यूनिटी डिग्री पर विच्छेदन करते हैं किसी ने किसी भाव जब समस्त गृह राहु से लेकर केतु के मध्य आ जाते हैं तब कालसर्प दोष बनता है
 राहु और केतु क्या है :-   कुंडली में केतु राहु की उपस्थिति रहती है
  यह दोनों छाया ग्रह है तो इनकी उपस्थिति अनिवार्य है यह दोनों चंद्रमा के बिंदु है

क्या असर डालता है जातक के जीवन में कालसर्प दोष =
यह कालसर्प दोष जातक के जीवन में बहुत अधिक संघर्ष का कारण बनता है इसके कारण कहीं पर भी उन्नति एवं सफलता नहीं मिलती है चाहे वह परिवार हो या व्यवसाय हो.!
कालसर्प दोष की कहीं रूप है जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि किन भाव में या दोस्त बन रहा है इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि एक भी ग्रह अगर राहु और केतु से बाहर हुआ तो यह दोष नहीं बनता है बता वहां पर कालसर्प दोष नहीं रहता है

कैसे करें कालसर्प दोष का निवारण =
अगर जातक में संपूर्ण भक्ति भाव का जब तक एवं साधना का संकल्प है तो यह उपाय सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं
अगर जातक के पास समय का अभाव है यश सशक्त भक्ति और समर्पण की कमी है तो फिर दान का महत्व है इसे काल भैरव के मंदिर में कुत्तों को खाना खिलाना शिव मंदिर में दोष पहनाना गरीबों में कंबल बांटना इस तरह के दान से इस दोष का निवारण किया जा सकता है


यंत्र-तंत्र = कुछ लोगों का ज्यादा विश्वास है नेत्र में भी रहता है इसी आओ यंत्र अंगूठी बनवाना इस प्रकार से भी अब कालसर्प दोष का निवारण कुछ हद तक कर सकते हैं

कालसर्प दोष पूजा के लिए विशेष स्थान -:
इस  कालसर्प दोष पूजा उज्जैनके लिए मुख्यत नासिक और उज्जैन में महत्वपूर्ण स्थान माने जाते हैं यजमान यहां पर पंडित जी के माध्यम से विधि विधान से कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजा करवाते हैं उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करते हैं