Sunday, December 20, 2020

कालसर्प योग से राहत के सरलतम उपाय एवं मंत्र.:-

 यदि जन्म पत्रिका नहीं हो तथा जीवन में निम्नलिखित समस्याओं में से कोई एक भी हो तो वे अपने आपको #कालसर्प दोष से पीड़ित समझें तथा उपाय करें।   1. मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त    2. व्यवसाय में हानि बार-बार होना।     3. अपनों से ठगा जाना।    4. अकारण कलंकित होना।     5-विवाह नहीं होना या वै‍वाहिक जीवन अस्त-व्यस्त होना।     6. बार-बार चोट-दुर्घटनाएं होना।     7. स्वास्थ्य खराब होना।    8.अच्‍छे किए गए कार्य का यश दूसरों को मिलना।     9.भयावह स्वप्न बार-बार आना, नाग-नागिन बार-बार दिखना।   10.काली स्त्री, जो भयावह हो या विधवा हो, रोते हुए दिखना।    11. गर्भपात होना या संतान होकर नहीं रहना आदि लक्षणों में से कोई एक भी हो  तो #कालसर्प दोष की शांति करवाएं।   नागपंचमी के दिन किए जाने वाले कुछ प्रयोग निम्नलिखित हैं जिनके करने  से कालसर्प दोष शिथिल होता है-    kalsar pdosh puja ujjain

1- नाग-नागिन का जोड़ा चांदी का बनवाकर पूजन कर जल में बहाएं।   


kalsar pdosh puja in ujjain

अगर आप भी इन सब समस्याओं से ग्रसित हैं तो तुरंत संपर्क करें हमारे कालसर्प दोष विशेषज्ञ पंडित जी से          Call Now- 8989540544   

Tuesday, July 28, 2020

सबसे पहले यह जानिए किस स्तिथि में मंगल दोष का प्रभाव जातक पर नहीं पड़ता है

1. यदि किसी वर-कन्या की जन्मपत्रिका में लग्न,चर्तुथ,सप्तम,अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि,राहु,केतु आदि स्थित हों तो मांगलिक दोष का परिहार हो जाता है।
2. यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी होता है।

   3. यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चर्तुथ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तब भी मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।
4. यदि मंगल अष्टम भाव में अपनी नीचरशि में कर्क में स्थित हो अथवा धनु राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है।



5. यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सिंह,कर्क,धनु,मीन आदि में स्थित हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

6. यदि वर-कन्या की जन्मपत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगलदोष मान्य नहीं होता है।अगर आप बी इस तरह की परेशानी से परेशान है तो सम्पर्क करिये हमारे मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ से

इसी तथ अन्य किसी प्रकार की पूजा जैसे कालसर्प दोष पूजा इस तरह की पूजा के बारे में भी जानने के लिए पडे हमारे रेगुलर ब्लॉग

Saturday, July 25, 2020

सर्वप्रथम यह जानिये क्या है मांगलिक दोष किसे कहते हैं 

इस बात पर हम पाठकों का ध्यान आकृष्ट करना चाहेंगे। सामान्यतः किसी भी जातक की जन्मपत्रिका में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में से किसी भी एक भाव में मंगल का स्थित होना मांगलिक दोष कहलाता है।

लग्ने व्यये पाताले जामित्रे चाष्टमे कुजे।
कन्याभर्तुविनाशः स्याद्भर्तुभार्याविनाशनम्‌॥
कुछ विद्वान इस दोष को तीनों लग्न अर्थात्‌ लग्न के अतिरिक्त चंद्र लग्न, सूर्य लग्न एवं शुक्र से भी देखते हैं। शास्त्रोक्त मान्यता है कि मांगलिक दोष वाले वर अथवा कन्या का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले जातक से ही होना आवश्यक है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य,शनि और राहु को अलगाववादी ग्रह एवं मंगल को मारणात्मक प्रभाव वाला ग्रह माना गया है। अतः लग्न, चर्तुथ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में स्थित होकर मंगल जीवनसाथी की आयु की हानि करता है। यहां हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि केवल मांगलिक दोष के होने मात्र से ही यहां जीवनसाथी की मृत्यु या दाम्पत्य सुख का अभाव कहना सही नहीं है अपितु जन्मपत्रिका के अन्य शुभाशुभ योगों के समेकित अध्ययन से ही किसी निर्णय पर पहुंचना श्रेयस्कर है किंतु ऐसा भी नहीं है कि यह दोष बिल्कुल ही निष्प्रभावी होता है।





जन्मपत्रिका में ऐसी अनेक स्थितियां है जो मंगल दोष पूजा के प्रभाव को कम करने अथवा उसका परिहार करने में सक्षम हैं। इनमें से कुछ योगों के बारे में हम यहां उल्लेख कर रहे हैं।

1. यदि किसी वर-कन्या की जन्मपत्रिका में लग्न,चर्तुथ,सप्तम,अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि,राहु,केतु आदि स्थित हों तो मांगलिक दोष का परिहार हो जाता है।
2. यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी होता है।

3. यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चर्तुथ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तब भी मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

4. यदि मंगल अष्टम भाव में अपनी नीचरशि में कर्क में स्थित हो अथवा धनु राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है।
5. यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सिंह,कर्क,धनु,मीन आदि में स्थित हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

6. यदि वर-कन्या की जन्मपत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगलदोष मान्य नहीं होता है।
अगर आप आप भी मंगल दोष पूजा उज्जैन में करवाना चाहते हो तो संपर्क करे मंगल दोष पूजा विशषज्ञ से



Sunday, June 28, 2020

जानिये किस तरह से सोचते है लोग मंगल दोष के बारे में ?


मांगलिक मिथक:-
यदि आप मंगलवार को पैदा हुए हैं तो आप पक्का मांगलिक हैं । यह बिल्कुल सच नहीं हे ।मांगलिक मिथकमांगलिक और अमांगलिक का तलक निश्चित हे। किसी भी शादी की उम्र दोनो लोगों के विचारों के मेल-जोल और समझदारी पे निर्भर करती हे ।

किस तरह का होते है मांगलिक व्यक्ति:-
  मांगलिक व्यक्ति विनम्र, निर्भय, प्रभावशाली, होशियार, केंद्रित, अनुशासित पर गुस्सैल होते हैं । उनमैं से जो वाइब्रेशन्स उत्पन्न होती हैं वे बहुत शक्तिमान एवं तेजस्वी होती हैं । इसी कारण ऐसा माना जाता हे की सिर्फ एक मांगलिक ही दूसरे मांगलिक की प्रकृति के साथ शांतिपूर्वक निभा सकता हे । एक और विचारधारा जो हमारे समाज मैं प्रचलित हे वह ये हे की 28 साल की उम्र के बाद मंगल का दोष कम हो जाता हे ।
इतिहास और मांगलिक प्रचलन
हमारे किसी पोराणिक ग्रंथ मैं मांगलिक दोष के बारे मैं नहीं कहा गया । कहीं भी महाभारत, रामायण या पुराण मैं यह सामने नहीं आया की विवाह पूर्व कुंडली या ग्रह मिलाये जाते थे । उनके हिसाब से यह एक नया विचार हे 

कुछ और प्रसिद्ध दोष निवारण उपाय हैं - केसरिया गणपति की पूजा, लाल कपड़े का दान, पीपल के पेड़ की दूध से पूजा और घर पे हाथी दान्त रखना । 
मांगलिक दोष और हम
मांगलिक दोष सिर्फ जनमकुंडली के 5 घरों मैं मंगल की उपस्तिथि के बारे मैं नहीं हैं । खुले दिमाग से, समझदारी से, तर्क-वितर्क करके सोचैं या किसी सुशिक्षित वयक्ति से परामर्श करैं। डर कर अंधविश्वास के कुएँ मैं ना कूदें !
  अगर आप भी इन सब समस्याओं से ग्रसित हैं तो तुरंत संपर्क करें हमारे  मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ पंडित जी से  


Wednesday, June 24, 2020

जानिए सर्वप्रथम मांगलिक दोष किसे कहते हैं  ???

इस बात पर हम पाठकों का ध्यान आकृष्ट करना चाहेंगे। सामान्यतः किसी भी जातक की जन्मपत्रिका में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में से किसी भी एक भाव में मंगल का स्थित होना मांगलिक दोष कहलाता है। 

लग्ने व्यये पाताले जामित्रे चाष्टमे कुजे।
कन्याभर्तुविनाशः स्याद्भर्तुभार्याविनाशनम्‌॥
कुछ विद्वान इस दोष को तीनों लग्न अर्थात्‌ लग्न के अतिरिक्त चंद्र लग्न, सूर्य लग्न एवं शुक्र से भी देखते हैं। शास्त्रोक्त मान्यता है कि मांगलिक दोष वाले वर अथवा कन्या का विवाह किसी मांगलिक दोष वाले जातक से ही होना आवश्यक है।

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य,शनि और राहु को अलगाववादी ग्रह एवं मंगल को मारणात्मक प्रभाव वाला ग्रह माना गया है। अतः लग्न, चर्तुथ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में स्थित होकर मंगल जीवनसाथी की आयु की हानि करता है। यहां हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि केवल मांगलिक दोष के होने मात्र से ही यहां जीवनसाथी की मृत्यु या दाम्पत्य सुख का अभाव कहना सही नहीं है अपितु जन्मपत्रिका के अन्य शुभाशुभ योगों के समेकित अध्ययन से ही किसी निर्णय पर पहुंचना श्रेयस्कर है किंतु ऐसा भी नहीं है कि यह दोष बिल्कुल ही निष्प्रभावी होता है।

जन्मपत्रिका में ऐसी अनेक स्थितियां है जो मंगल दोष पूजा मंगल दोष पूजाके प्रभाव को कम करने अथवा उसका परिहार करने में सक्षम हैं।

                                   mangal dosh puja ujjain
 इनमें से कुछ योगों के बारे में हम यहां उल्लेख कर 
रहे हैं।
1. यदि किसी वर-कन्या की जन्मपत्रिका में लग्न,चर्तुथ,सप्तम,अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि,राहु,केतु आदि स्थित हों तो मांगलिक दोष उज्जैन का परिहार हो जाता है।
2. यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी होता है।

3. यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चर्तुथ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तब भी मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

4. यदि मंगल अष्टम भाव में अपनी नीचरशि में कर्क में स्थित हो अथवा धनु राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है।
5. यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सिंह,कर्क,धनु,मीन आदि में स्थित हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

6. यदि वर-कन्या की जन्मपत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगलदोष मान्य नहीं होता है।

Saturday, June 20, 2020

जानिए क्या है मांगलिक मिथक और मंगल दोष के उपाय ?



मांगलिक मिथक
यदि आप मंगलवार को पैदा हुए हैं तो आप पक्का मांगलिक हैं । यह बिल्कुल सच नहीं हे ।मांगलिक मिथकमांगलिक और अमांगलिक का तलक निश्चित हे। किसी भी शादी की उम्र दोनो लोगों के विचारों के मेल-जोल और समझदारी पे निर्भर करती हे ।  

मांगलिक दोष के उपाय
कुछ और प्रसिद्ध दोष मांगलिक निवारण उपाय हैं - केसरिया गणपति की पूजा, लाल कपड़े का दान, पीपल के पेड़ की दूध से पूजा और घर पे हाथी दान्त रखना ।  
मांगलिक दोष और हम
मांगलिक दोष सिर्फ जनमकुंडली के 5 घरों मैं मंगल की उपस्तिथि के बारे मैं नहीं हैं । खुले दिमाग से, समझदारी से, तर्क-वितर्क करके सोचैं या किसी सुशिक्षित वयक्ति से परामर्श करैं। डर कर अंधविश्वास के कुएँ मैं ना कूदें !
और अधिक जानकारी के लिए करिए यहाँ पर क्लिक जानिए मंगल दोष के बारे अधिक जानकारी
mangal bhat puja in ujjain
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Wednesday, June 10, 2020

मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के उपाय

1. यदि किसी वर-कन्या की जन्मपत्रिका में लग्न,चर्तुथ,सप्तम,अष्टम और द्वादश स्थान में अन्य कोई पाप ग्रह जैसे शनि,राहु,केतु आदि स्थित हों तो मांगलिक दोष का परिहार हो जाता है।
2. यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी होता है।

   3. यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि मेष में अथवा चर्तुथ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकरस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हो तब भी मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।



4. यदि मंगल अष्टम भाव में अपनी नीचरशि में कर्क में स्थित हो अथवा धनु राशि स्थित मंगल द्वादश भाव में हो तब मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है।
5. यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सिंह,कर्क,धनु,मीन आदि में स्थित हो तो मंगलदोष निष्प्रभावी हो जाता है।

6. यदि वर-कन्या की जन्मपत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगलदोष मान्य नहीं होता है।अगर आप बी इस तरह की परेशानी से परेशान है तो सम्पर्क करिये हमारे मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ से

Wednesday, June 3, 2020

जानिए क्या है कालसर्प दोष पूजा है 


प्रत्येक जातक की कुंडली को राहु और केतु 180 यूनिटी डिग्री पर विच्छेदन करते हैं किसी ने किसी भाव जब समस्त गृह राहु से लेकर केतु के मध्य आ जाते हैं तब कालसर्प दोष बनता है
 राहु और केतु क्या है :-   कुंडली में केतु राहु की उपस्थिति रहती है
  यह दोनों छाया ग्रह है तो इनकी उपस्थिति अनिवार्य है यह दोनों चंद्रमा के बिंदु है

क्या असर डालता है जातक के जीवन में कालसर्प दोष =
यह कालसर्प दोष जातक के जीवन में बहुत अधिक संघर्ष का कारण बनता है इसके कारण कहीं पर भी उन्नति एवं सफलता नहीं मिलती है चाहे वह परिवार हो या व्यवसाय हो.!
कालसर्प दोष की कहीं रूप है जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि किन भाव में या दोस्त बन रहा है इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि एक भी ग्रह अगर राहु और केतु से बाहर हुआ तो यह दोष नहीं बनता है बता वहां पर कालसर्प दोष नहीं रहता है

कैसे करें कालसर्प दोष का निवारण =
अगर जातक में संपूर्ण भक्ति भाव का जब तक एवं साधना का संकल्प है तो यह उपाय सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं
अगर जातक के पास समय का अभाव है यश सशक्त भक्ति और समर्पण की कमी है तो फिर दान का महत्व है इसे काल भैरव के मंदिर में कुत्तों को खाना खिलाना शिव मंदिर में दोष पहनाना गरीबों में कंबल बांटना इस तरह के दान से इस दोष का निवारण किया जा सकता है


यंत्र-तंत्र = कुछ लोगों का ज्यादा विश्वास है नेत्र में भी रहता है इसी आओ यंत्र अंगूठी बनवाना इस प्रकार से भी अब कालसर्प दोष का निवारण कुछ हद तक कर सकते हैं

कालसर्प दोष पूजा के लिए विशेष स्थान -:
इस  कालसर्प दोष पूजा उज्जैनके लिए मुख्यत नासिक और उज्जैन में महत्वपूर्ण स्थान माने जाते हैं यजमान यहां पर पंडित जी के माध्यम से विधि विधान से कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजा करवाते हैं उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करते हैं 



Friday, May 22, 2020

क्या करना चाहिए अगर जातक को एकाधिक मांगलिक दोष हो तो ???


कुंडली में बहुत सी बार एकाधिक मांगलिक दोष भी होता है। इसको समाप्त करने के लिए भी उपाय हैं। इसका मुख्य उपाय कुंभ विवाह करवाना होता है। जो मांगलिक जातक रहता है उसका विवाह किसी मिट्टी के बर्तन से करवा दें। विवाह होने के पश्चात , जिस बर्तन से विवाह कराया गया है उस बर्तन को बहते जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
                        कुंडली से मंगल दोष खत्म करने के लिए ... 

 क्या करना चाहिए मांगलिक दोष के जातक को जिससे मांगलिक दोष का प्रभाव कम हो जाये
1-मांगलिक दोष वाले जातक को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए !
2-  जो लड़की मंगली रहती है उसको गणेश जी और मंगल यंत्र की पूजा करनी चाहिए।
3- जो मांगलिक रहता है उसको मंगलवार का व्रत करना चाहिए।

  अगर आप इस दोष से करे हमारे मंगल दोष पूजा उज्जैन  मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ विशेषज्ञ पंडित जी से उज्जैन में और पूजा करवाएं दोष से मुक्ति पाये! 

Thursday, May 21, 2020

जानिए किन स्तिथियो में मंगल दोष का प्रभाव कम रहता है

1 - यदि मंगल पर गुरु की पूर्णता है दृष्टि हो तो मंगल दोष का प्रभाव नहीं रहता है
 2 -यदि मंगल अपनी मित्र राशि जैसे सी कर्क धनु मीन आदि में स्थित हो तो मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है 
3 - यदि वरकन्या की जन्म पत्रिका में मंगल की चंद्र अथवा गुरु से युति हो तो मंगल दोष माने नहीं होता है
4-  यदि लग्न में मंगल अपनी स्वराशि में इसमें अथवा चतुर्थ भाव में अपनी स्वराशि वृश्चिक में अथवा मकर 
5-  यदि मंगल पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो मंगल दोष ने सुनवाई होता है


  शांति पूजा से भी इस दोष को हमेशा के लिए समाप्‍त किया जा सकता है।
  एकाधिक मांगलिक दोष  यदि आपकी कुंडली में डबल या ट्रिपल मांगलिक दोष है तो इसे एकाधिक मांगलिक दोष कहा जाता है। इस दोष का उपाय कुभ विवाह है जिसके अंतर्गत मांगलिक जातक की मिट्टी के पॉट से विवाह कराया जाता है। विवाह के पश्‍चात् इस मिट्टी के पॉट को बहते जल में प्रवाहित कर दिया जाता है। इस उपाय से मांगलिक दोष पूरी तरह खत्‍म हो जाता ह
अगर आप भी इस तरह से परेशां हो तो करवाइये आप भी   मंगल दोष पूजा उज्जैन  ..!

Tuesday, May 19, 2020

जानिये किस तरह का दोष मंगल दोष होता है

कुंडली में मंगल की स्थिति के आधार पर मांगलिक दोष निर्भर करता है। कुंडली में मांगलिक दोष है यह जानकर ही लोग घबरा जाते हैं क्‍योंकि इसका प्रभाव वैवाहिक जीवन के लिए अत्‍यंत घातक होता है। मांगलिक दोष के बारे में यह अटूट विश्‍वास है कि जिनकी कुंडली में यह दोष हो उन्‍हें मंगली जीवनसाथी से ही विवाह करना चाहिए तभी उनका वैवाहिक जीवन सफल हो सकता है।कैसे बनता है मंगल दोष…मंगल दोष अत्यधिक प्रभावशाली दोष है। मंगल ग्रह की स्थिति व दृष्टी दोनों ही मारक प्रभाव रखते हैं। मंगल दोष का सर्वाधिक प्रभाव विवाह सम्बंधों में पडता हैं। अत: जन्मकुंडली मिलान के समय मंगल दोष विचार अवश्य करना चाहिये। मंगल की जन्म कुंडली में विशेष भाव स्थिति मंगल दोष को उत्पन्न करती है।जब मंगल जन्म कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें एवम बारहवें स्थान में स्थित हो तो व्यक्ति मंगल दोष से युक्त होता हैं। मंगल का इन स्थानों में स्थित होने का मतलब है कि विवाह स्थान पर मंगल का प्रत्यक्ष प्रभाव पडना।

                        8 Most Successful Remedies To Mitigate Manglik Dosh! Must Follow
 मांगलिक दोष पूजा मंत्र = 
ॐ मंगलाय नमःॐ भूमि पुत्राय नमःॐ महाकाय नमःॐ सिद्ध मंगलाय नमःमागलिक दोष पूजा के लिए आवश्यक जानकारीजन्मतिथि, जन्म का समय, जन्म स्थान, गोत्र।एक से ज्यादा लोगों के नाम पर मंगल दोष पूजा कराने के लिए आपको हमें उनके नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और गोत्र आदि की जानकारी देना अनिवार्य हैं
अगर आप भी इस तरह की पूजा करवाना चाहते है तो संपर्क करिये हमारे मंगल दोष पूजा उज्जैन विशेषज्ञ से

Monday, May 18, 2020

जानिए क्या है  आम विचार धारा मंगल दोष के बारे -

मांगलिक व्यक्ति विनम्र, निर्भय, प्रभावशाली, होशियार, केंद्रित, अनुशासित पर गुस्सैल होते हैं । उनमैं से जो वाइब्रेशन्स उत्पन्न होती हैं वे बहुत शक्तिमान एवं तेजस्वी होती हैं । इसी कारण ऐसा माना जाता हे की सिर्फ एक मांगलिक ही दूसरे मांगलिक की प्रकृति के साथ शांतिपूर्वक निभा सकता हे । एक और विचारधारा जो हमारे समाज मैं प्रचलित हे वह ये हे की 28 साल की उम्र के बाद मंगल का दोष कम हो जाता हे ।
इतिहास और मांगलिक प्रचलन
हमारे किसी पोराणिक ग्रंथ मैं मांगलिक दोष के बारे मैं नहीं कहा गया । उनके हिसाब से यह एक नया विचार हे । कहीं भी महाभारत, रामायण या पुराण मैं यह सामने नहीं आया की विवाह पूर्व कुंडली या ग्रह मिलाये जाते थे 

मांगलिक मिथक
यदि आप मंगलवार को पैदा हुए हैं तो आप पक्का मांगलिक हैं । यह बिल्कुल सच नहीं हे ।मांगलिक मिथकमांगलिक और अमांगलिक का तलक निश्चित हे। किसी भी शादी की उम्र दोनो लोगों के विचारों के मेल-जोल और समझदारी पे निर्भर करती हे ।  

                                                      

मांगलिक दोष के उपाय
कुछ और प्रसिद्ध दोष निवारण उपाय हैं - केसरिया गणपति की पूजा, लाल कपड़े का दान, पीपल के पेड़ की दूध से पूजा और घर पे हाथी दान्त रखना ।
मांगलिक दोष और हम
मांगलिक दोष सिर्फ जनमकुंडली के 5 घरों मैं मंगल की उपस्तिथि के बारे मैं नहीं हैं । खुले दिमाग से, समझदारी से, तर्क-वितर्क करके सोचैं या किसी सुशिक्षित वयक्ति से परामर्श करैं। डर कर अंधविश्वास के कुएँ मैं ना कूदें !
अगर आप भी इन सब समस्याओं से ग्रसित हैं तो तुरंत संपर्क करें हमारे मंगल दोष पूजा उज्जैनमंगल दोष पूजा उज्जैन  विशेषज्ञ पंडित जी से  

Sunday, May 10, 2020

आखिर कुंडली में कैसे बनता है मंगल दोष ??

`
कुंडली में होने वाला मंगल दोष अत्यधिक प्रभावशाली होता है।
कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति व दृष्टी दोनों ही प्रभाव रखते हैं ज्योतिष के अनुसार मंगल दोष का सबसे अधिक प्रभाव किसी मंगली के विवाह सम्बंधों में ही पड़ता हैं।
 इसलिए जन्मकुंडली मिलान के समय मंगल दोष का उपचार कर लेना आवश्यक होता है। मंगल दोष के कारण जीवनसाथी की मौत होने की भी आंशका रहती है।
 जब मंगल जन्म कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें स्थान में स्थित होता है
तब कोई व्यक्ति मंगल दोष से परेशान रहता है। 

                                                    मांगलिक दोष पूजा उज्जैन    
               
मंगल का इन स्थानों में स्थित होने जातक के विवाह संबंधों में परेशानी आती है।
मांगलिक दोष उपाय
 विवाह में देरी।
  विवाह तय होने के बाद टूट जाना, विवाह  होते ही वाधाएं आना। 
 शादी के बाद जीवनसाथी के साथ अनबन रहना।
 वैवाहिक जीवन में परेशानियां। मंगल जातक का हमेशा क्रोध करते रहना।
 मांगलिक दोष के प्रभाव में जातक क्रोधी, अहंकारी और झगड़ालू होता जाता है।
  मंगली लड़की  के विवाह में देरी मंगली लड़की के प्रभाव से पति पर बुरा असर होना।

इस तरह के पूजा के लिए संपर्क करे  मांगलिक दोष पूजा उज्जैन के लिए

Tuesday, May 5, 2020

वास्तु के हिसाब से कौन-सी दिशा का धन लाभ में सर्वाधिक महत्व है ?

घोड़े की नाल, रसोई घर में बल्ब और स्वास्तिक का रखें ध्यान-वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारे घर में वास्तु दोष के लिए कुछ हद तक हम स्वयं जिम्मेदार रहते है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सुख, शांति व समृद्धि के लिए रसोई घर बहुत ही खास माना गया है। अगर आपके घर में रसोई घर गलत स्थान पर है तो अग्निकोण में बल्ब लगा दें। जिससे रसोई घर का वास्तु दूर हो जाएगा। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में घोड़े की नाल टांगना बड़ा ही शुभ माना गया है। इसलिए अपने मुख्य द्वार पर काले घोड़े की यू आकार की नाल लगा दें। जिससे आपको सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा मिलती रहेगी। इसी तरह घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर का बड़ा स्वास्तिक चिन्ह बना दें। क्योंकि हमारी संस्कृति में स्वास्तिक का विशेष महत्व है। घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष हट जाएगा।


सोने की दिशा, कचरा पेटी एवं टॉयलेट का रखें ध्यान-  वास्तु के अनुसार आपको घर में दक्षिण दिशा में सोना चाहिए। जिससे आपके स्वभाव में बदलाव होगा। ध्यान रखें कि पश्चिम की और सिर रख कर नहीं सोये। घर के उत्तर व पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा ना होने दें और ना ही इधर भारी मशीनें रखें। यह आपके घर में वास्तु दोष का कारण बन सकता है। आप घर के उत्तर-पूर्व में कचरा पेटी रख दें। यदि आपके घर के पूर्व कोने में टॉयलेट है तो सीट को इस तरह लगाएं कि उस पर उत्तर या दक्षिण की और मुंह करके बैठ सके। इससे आपके घर का वास्तु दूर होगा और आपको हर काम में अवश्य ही सफलता   मिलेंगी।
घर में करवाएं रामायण का पाठ, रखें कलश, लगाएं
अगर आप भी इस तरह की पूजा करवाना चाहते हैं तो संपर्क करें हमारे वास्तु दोष पूजा उज्जैन  विशेषज्ञ से !
mangal dosh puja ujjain
वास्तु दोष पूजा उज्जैन
मंगलभात पूजा उज्जैन

Tuesday, April 28, 2020

जानिये क्‍या है मांगलिक दोष ?

ज्‍योतिषानुसार जन्‍मकुंडली में मंगल दोष को मांगलिक दोष भी कहा जाता है। कुंडली में मंगल की स्थिति के आधार पर मांगलिक दोष निर्भर करता है। कुंडली में मांगलिक दोष है यह जानकर ही लोग घबरा जाते हैं क्‍योंकि इसका प्रभाव वैवाहिक जीवन के लिए अत्‍यंत घातक होता है। मांगलिक दोष के बारे में यह अटूट विश्‍वास है कि जिनकी कुंडली में यह दोष हो उन्‍हें मंगली जीवनसाथी से ही विवाह करना चाहिए तभी उनका वैवाहिक जीवन सफल हो सकता है।कैसे बनता है मंगल दोष…मंगल दोष अत्यधिक प्रभावशाली दोष है। मंगल ग्रह की स्थिति व दृष्टी दोनों ही मारक प्रभाव रखते हैं। मंगल दोष का सर्वाधिक प्रभाव विवाह सम्बंधों में पडता हैं। अत: जन्मकुंडली मिलान के समय मंगल दोष विचार अवश्य करना चाहिये। मंगल की जन्म कुंडली में विशेष भाव स्थिति मंगल दोष को उत्पन्न करती है।जब मंगल जन्म कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें एवम बारहवें स्थान में स्थित हो तो व्यक्ति मंगल दोष से युक्त होता हैं। मंगल का इन स्थानों में स्थित होने का मतलब है कि विवाह स्थान पर मंगल का प्रत्यक्ष प्रभाव पडना।

                                               मांगलिक दोष पूजा विशेषज्ञ

 मांगलिक दोष पूजा मंत्र = 
ॐ मंगलाय नमःॐ भूमि पुत्राय नमःॐ महाकाय नमःॐ सिद्ध मंगलाय नमःमागलिक दोष पूजा के लिए आवश्यक जानकारीजन्मतिथि, जन्म का समय, जन्म स्थान, गोत्र।एक से ज्यादा लोगों के नाम पर मंगल दोष पूजा कराने के लिए आपको हमें उनके नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और गोत्र आदि की जानकारी देना अनिवार्य हैं
अगर आप भी इस तरह की पूजा करवाना चाहते हो तो संपर्क करिये हमारे मांगलिक दोष पूजा विशेषज्ञ से
मंगल दोष पूजा उज्जैन 
मंगल भात पूजा उज्जैन

Saturday, April 25, 2020

जाने कैसे खत्म करें मांगलिक दोष को?

जानिये किस तरह प्रभावित करता है कुंडली में अगर मंगल दोष हो तो? कुंडली में मंगल दोष का होना। बहुत अधिक प्रभावशाली माना गया है। कुंडली में मंगल ग्रह की। दृष्टि एवं स्थिति दोनों का प्रभाव रहता ह , ज्योतिषी के अनुसार मंगल दोष जो होता है। उसका सबसे अधिक प्रभाव विवाह संबंधों में ही पड़ता है। इसलिए जन्म कुंडली मिलाने के दौरान मंगल दोष का समाधान करना अति आवश्यक होता है ,,क्योंकि मंगल दोष के ही कारण जो जीवनसाथी होता है उसके मौत होने तक की आशंका रहती है। किसी की जन्म कुंडली में जब मंगल पहले,चौथे एवं सातवें और आठवें तथा बारहवें स्थान में स्थित होता है। तभी जो दोष बनता है वह व्यक्ति मंगल दोष से परेशान रहता है।



जाने कैसे खत्म करें मांगलिक दोष को?

मांगलिक दोष का सर्वोत्तम उपाय होता है कि उसका विवाह मांगलिक से ही हो जाए। इससे जो मंगल दोष है, उसका प्रभाव कम हो जाता है। जो मांगलिक जातक रहता है। उसको कुंभ विवाह शालिगराम विवाह, तथा पीपल विवाह एवं मंगल यंत्र का पूजन आदि जरूर करना चाहिए। इसके कारण व सामान्य ग्रह के जातक से भी संबंध रख पाएगा। एवं इस उपाय से मंगल का दोष उतर जाता है।

जानिए आंशिक मांगलिक दोष के बारे में?

आंशिक मांगलिक दोष 18 वर्ष की आयु तक रहता है। इसके निवारण हेतु  पूजन एवं अनुष्ठान करना चाहिए। आंशिक मंगल दोष का दुष्प्रभाव शांति पूजा से भी कम हो जाता है।

क्या होता है एकाधिक मांगलिक दोष ?

कुंडली में बहुत सी बार एकाधिक मांगलिक दोष भी होता है। इसको समाप्त करने के लिए भी उपाय हैं। इसका मुख्य उपाय कुंभ विवाह करवाना होता है। जो मांगलिक जातक रहता है उसका विवाह किसी मिट्टी के बर्तन से करवा दें। विवाह होने के पश्चात , जिस बर्तन से विवाह कराया गया है उस बर्तन को बहते जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।

जानिए और क्या करना चाहिए मांगलिक दोष के जातक को?

1- मांगलिक दोष वाले जातक को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए !
2- जो लड़की मंगली रहती है उसको गणेश जी और मंगल यंत्र की पूजा करनी चाहिए।
3- जो मांगलिक रहता है उसको मंगलवार का व्रत करना चाहिए।
अगर आप इस दोष से परेशांन हो तो संपर्क करिएँ हमारे उज्जैन में मंगल दोष निवारण पूजा विशेषज्ञ पंडित जी से उज्जैन में और पूजा करवाएं दोष से मुक्ति पाये!

Tuesday, April 21, 2020

जाने कैसे खत्म करें मांगलिक दोष को?

जानिये किस तरह प्रभावित करता है कुंडली में अगर मंगल दोष हो तो  ??
कुंडली में मंगल दोष का होना। बहुत अधिक प्रभावशाली माना गया है। कुंडली में मंगल ग्रह की। दृष्टि एवं स्थिति दोनों का प्रभाव रहता ह , ज्योतिषी के अनुसार मंगल दोष जो होता है। उसका सबसे अधिक प्रभाव विवाह संबंधों में ही पड़ता है। इसलिए जन्म कुंडली मिलाने के दौरान मंगल दोष का समाधान करना अति आवश्यक होता है ,,क्योंकि मंगल दोष के ही कारण जो जीवनसाथी होता है उसके मौत होने तक की आशंका रहती है। किसी की जन्म कुंडली में जब मंगल पहले,चौथे एवं सातवें और आठवें तथा बारहवें स्थान में स्थित होता है। तभी जो दोष बनता है वह व्यक्ति मंगल दोष से परेशान रहता है।

जाने कैसे खत्म करें मांगलिक दोष को?
मांगलिक दोष का सर्वोत्तम उपाय होता है कि उसका विवाह मांगलिक से ही हो जाए। इससे जो मंगल दोष है, उसका प्रभाव कम हो जाता है। जो मांगलिक जातक रहता है। उसको कुंभ विवाह शालिगराम विवाह, तथा पीपल विवाह एवं मंगल यंत्र का पूजन आदि जरूर करना चाहिए। इसके कारण व सामान्य ग्रह के जातक से भी संबंध रख पाएगा। एवं इस उपाय से मंगल का दोष उतर जाता है।

जानिए आंशिक मांगलिक दोष के बारे में ?
आंशिक मांगलिक दोष 18 वर्ष की आयु तक रहता है। इसके निवारण हेतु  पूजन एवं अनुष्ठान करना चाहिए। आंशिक मंगल दोष का दुष्प्रभाव शांति पूजा से भी कम हो जाता है।

क्या होता है एकाधिक मांगलिक दोष ?
कुंडली में बहुत सी बार एकाधिक मांगलिक दोष भी होता है। इसको समाप्त करने के लिए भी उपाय हैं। इसका मुख्य उपाय कुंभ विवाह करवाना होता है। जो मांगलिक जातक रहता है उसका विवाह किसी मिट्टी के बर्तन से करवा दें। विवाह होने के पश्चात , जिस बर्तन से विवाह कराया गया है उस बर्तन को बहते जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।

जानिए और क्या करना चाहिए मांगलिक दोष के जातक को?
1-मांगलिक दोष वाले जातक को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए !
2-  जो लड़की मंगली रहती है उसको गणेश जी और मंगल यंत्र की पूजा करनी चाहिए।
3- जो मांगलिक रहता है उसको मंगलवार का व्रत करना चाहिए।
अगर आप इस दोष से परेशां हो तो संपर्क क्रिया हमारे पूजा विशेषज्ञ पंडित जी से उज्जैन में और पूजा करवाएं दोष से मुक्ति पाये!