मंगल दोष -
जब किसी जातक या जातिका की कुंडली में मंगल किसी विशेष भावो मे जुड़े हो या उस पर किसी तरह का नकारातमक प्रभाव डाल रहे हो तो ऐसे जातक या जातिका मंगल दोष से प्रभावित होगा
और इस मंगल दोष का प्रभाव जातक के विवाहिक जीवन में ही सबसे ज्यादा पड़ता है विवाह में रूकावट आना वैवाहिक जीवन शांतिपूर्ण तरीके से नहीं चलना आदि!
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल भगवान जो है हमारे रिश्तो पर दिमाग पर अधिपत्य हो जाते है
होता क्या है मांगलिक दोष - पत्रिका के लगन भाव में या सप्तम भाव में चतुर्थ भाव में अष्टम भाव में या द्वादश भाव में स्तिथ हो तो कुंडली में मंगल दोष होता है
इस मांगलिक दोष के प्रभाव -
लग्न भाव में अगर मंगल है तो उस जातक का स्वाभाव क्रोधी स्वाभाव का रहता है
चतुर्थ भाव में जब मंगल हो तो जातक के जीवन में दुख बहुत रहते है एवं परिवार में शांति नहीं रहती है
अगर किसी जातक के सप्तम भाव में मंगल है तो उस जातक को वैवाहिक संबंध बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है
अष्टम भाव में मंगल स्तिथ रहने से विवाहीक जीवन में परेशानी आती है एवं इसमें जातक के ससुराल तरफ से संबंध बिगड़ते है
द्वादश भाव में मंगल होने पर जातक या उनके परिवार में बार बार किसी न किसी का बीमार होते रहना है आयु क्षीण होना आदि
निष्कर्ष - शास्त्र किसी भी दोष को स्पष्ट रूप से बताने में सक्षम में कुछ जैसे मंगल दोष पूजा अथवा दान आदि से कुछ संभव भी है पर यह कहना बिलकुल अनुचित होगा की किसी दोष को आप को पूर्णता समाप्त हो जाये! यदि कोई जातक मांगलिक है तो यह जरूर कर सकते है की उसकी शादी किसी मांगलिक से ही करवा कर इस दोष को आप कम कर सकते हो यही एक इस तरह का मुख्य उदेश्य है

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