Thursday, March 25, 2021

समजिये इस ब्लॉग के माध्यम से कालसर्प दोष के बारे में विस्तृत जानकारी -:

 यह कालसर्प दोष जातक के जीवन में बहुत अधिक संघर्ष का कारण बनता है इसके कारण कहीं पर भी उन्नति एवं सफलता नहीं मिलती है चाहे वह परिवार हो या व्यवसाय हो.!

कालसर्प दोष की कहीं रूप है जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि किन भाव में या दोस्त बन रहा है इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि एक भी ग्रह अगर राहु और केतु से बाहर हुआ तो यह दोष नहीं बनता है  वहां पर कालसर्प दोष नहीं रहता है

कैसे करें कालसर्प दोष का निवारण =

अगर जातक में संपूर्ण भक्ति भाव का जब तक एवं साधना का संकल्प है तो यह उपाय सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं

अगर जातक के पास समय का अभाव है यश सशक्त भक्ति और समर्पण की कमी है तो फिर दान का महत्व है इसे काल भैरव के मंदिर में कुत्तों को खाना खिलाना शिव मंदिर में जल चढ़ाना ,गरीबों में कंबल बांटना इस तरह के दान से इस कालसर्प दोष का निवारण किया जा सकता है

यंत्र-तंत्र = कुछ लोगों का ज्यादा विश्वास है नेत्र में भी रहता है इसलिए यंत्र अंगूठी बनवाना इस प्रकार से भी अब कालसर्प दोष का निवारण कुछ हद तक कर सकते हैं

कालसर्प दोष पूजा के लिए विशेष स्थान -:

इस कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में  महत्वपूर्ण स्थान माना जाता  हैं यजमान यहां पर पंडित जी के माध्यम से विधि विधान से कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजा करवाते हैं उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करते हैं 

Monday, March 15, 2021

जानिए उज्जैन में कैसे मनाते बाबा महाकाल के साथ में होली का त्यौहार

हम सभी जानते है की दुनिया में मनाये जाने वाला महकाल के  त्यौहार की शुरुवात महाकाल बाबा की नगरी उज्जैन से ही होती है और बाबा महकाल से ही होती है और ये वर्षो की परम्परा है, उज्जैन में बाबा महकाल में होली का उत्सव मनाया जाता  है इसमें राजा धी राज महकाल बाबा स्वयं होली खेलते है

कहने का तात्पर्य यह है की होली की संध्या के दिन मंदिर के पण्डे पुजारी और यह पर होली खेलते है इस दर्शनार्थियों की भारी भीड़ यह पर देखने को मिलती है
भक्त  अबीर गुलाल से एक दूसरे को रंग लगाते है उसके बाद आरती होती है तत्पश्चात होलिका दहन होता है
आरती के बाद यहां होलिका दहन किया गया जाता है और भक्त बाबा के भजनों में झूमते नजर आते हैं।


महकाल बाबा के यहा पर एक दिन पहले होली मनाने कि शुरुवात हो जाती है यह पर परम्परा के अनुसार संध्या आरती में ही महाकाल राजा को रंग लगाया जाता है वह के पुजारी अबीर गुलाल से खूब रंग लगा कर मग्न हो जाते है आरती भी विशेष प्रकार के मंत्रोचरण के साथ  होती है ततपशचात हलिका दहन होती है आरती के समय भी बाबा के भक्तो पर होली का खूब रंग चढ़ता है

भजन संध्या - इसके बाद फिर महाकाल बाबा के यह पर भजन संध्या का आयोजन भी किया जाता है जिसमे भक्त खूब झूमते नाचते गाते भी है खूब एक दूसरे को रंग लगाते है
होली के महापर्व को मनाने के लिए विदेशों से भी खूब दर्शनार्थी आते है और खूब धूमधाम से इस त्यौहार को मनाते है यह प्रथा महाकाल मंदिर में बहुत पुराने समय से चली आ  रही है

Friday, March 12, 2021

समजिये मंगल दोष के बारे में विशेष तरह की जानकारी आखिर क्या है मांगलिक दोष का निवारण -

मंगल  दोष - 

जब किसी जातक या जातिका की कुंडली में मंगल किसी विशेष भावो मे  जुड़े हो या उस पर किसी तरह का नकारातमक प्रभाव डाल रहे हो तो ऐसे जातक या जातिका मंगल दोष से प्रभावित होगा 

और इस मंगल दोष का प्रभाव जातक के विवाहिक जीवन में ही सबसे ज्यादा पड़ता है विवाह में रूकावट आना वैवाहिक जीवन शांतिपूर्ण तरीके से नहीं चलना आदि!

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल भगवान जो है हमारे रिश्तो पर दिमाग पर अधिपत्य हो जाते है  

होता क्या है मांगलिक दोष - पत्रिका के लगन भाव में या सप्तम भाव में चतुर्थ भाव में अष्टम भाव में या द्वादश भाव में स्तिथ हो तो कुंडली में मंगल दोष होता है 


इस मांगलिक दोष के प्रभाव - 

लग्न भाव में अगर मंगल है तो उस जातक का स्वाभाव क्रोधी स्वाभाव का रहता है 

चतुर्थ भाव में जब मंगल हो तो जातक के जीवन में दुख बहुत रहते है एवं परिवार में शांति नहीं रहती है 

अगर किसी जातक के सप्तम भाव में मंगल है तो उस जातक को वैवाहिक संबंध बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है 

अष्टम भाव में मंगल स्तिथ रहने से विवाहीक जीवन में परेशानी आती है एवं इसमें जातक के ससुराल तरफ से संबंध बिगड़ते   है 

द्वादश भाव में मंगल होने पर जातक या उनके परिवार में बार बार किसी न किसी का बीमार होते रहना है आयु क्षीण होना आदि 

निष्कर्ष - शास्त्र किसी भी दोष को स्पष्ट रूप से बताने में सक्षम में कुछ जैसे मंगल दोष पूजा  अथवा दान आदि से कुछ संभव  भी है पर यह कहना बिलकुल अनुचित होगा की किसी दोष को आप को पूर्णता समाप्त हो जाये! यदि कोई जातक मांगलिक है तो यह जरूर कर सकते है की उसकी शादी किसी मांगलिक से ही करवा कर इस दोष को आप कम कर सकते हो यही एक इस तरह का मुख्य उदेश्य है 


Monday, March 8, 2021

क्यों है विशेष महत्व उज्जैन महाकाल में शिवरात्रि के दिन कालसर्प दोष पूजा एवं मंगल दोष पूजा का ?

अगर उज्जैन में आप शिवरात्रि के दिन जा रहे हो या इस दिन पूजन अनुष्ठान क्र रहे हो तो यह अपने आप में पुण्य फल मिलने वाली बात है 

क्यूंकि शास्त्रों के अनुसार यह कहा गया है की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना  गया है 

1. क्षिप्रा नदी = सभी ज्योतिर्लिंग में भी ये इसलिए भी सर्वश्रेष्ठ है क्यूंकि ये माँ शिप्रा नदी के किनारे स्तिथ है इसी नदी पर ही हर बार १२ साल में लगने वाले सिंहस्थ का आयोजन होता है 

2. भस्मारती = सारे ज्योतिर्लिंग में से ये एक ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहा सुबह की आरती मुर्दो की भस्म से ही होती है

कालसर्प दोष पूजा = आप सब जानते हो की कालसर्प दोष की पूजा घर में सुख शांति नहीं होना, या रात को डरावने सपने आना इन सब के कारणों से जातक की कुंडली में भी कालसर्प दोष निकल जाता है जिससे इसके निदान हेतु से जातक कालसर्प दोष की पूजा उज्जैन करवाते है 

इससे तात्पर्य है की इस दिन महाशिवरात्रि के दिन इस पूजा को करने से विशेष लाभ मिलता है अतः कालसर्प दोष पूजा जिस भी जातक को करवान रहता है उसके लिए ये साल का सर्वश्रेष्ठ मुहरत होता है 

मंगल दोष पूजा उज्जैन = जिस भी जातक की कुंडली में मंगल का दोष हो तो उसको उज्जैन में आकर पूजा करना पड़ती है तभी इस दोष से मुक्ति मिल पाती  है वैसे तो मंगल दोष पूजा के लिए उज्जैन में मंगल नाथ का मंदिर है जहा पर ही इसकी पूजा होती है और आप कभी भी इस पूजा को साल में करा सकते हो 

परन्तु कहा  गया है  शिवरात्रि वाले महादिन इसकी पूजा करवाने से विशेष पुण्य फल मिलता है एवं तुरंत इसका पुण्य लाभ व्यक्ति को मिलता है 

शिवरुद्राभिषेक = इस दिन  के लिए शास्त्रों के अनुसार ऐसा भी कहा गया है की इस पूजा का विशेष लाभ मिलता है क्यूंकि आप भी जानते है रुद्राभिषेक जो होता है वह शिव जी के शिवलिंग पर रूद्र मंत्रो के माध्यम से होता है 

इसीलिए शिवरात्रि के दिन उज्जैन में आइये और करवाइये ये पुजाये और पाइये इन सब दोषो से मुक्ती 

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#mahakaldarshanshivratri 

#shivatridarshan

Tuesday, March 2, 2021

जानिए कुंडली में कैसे बनता हे पंच महापुरुष योग ??

 इस योग से व्यक्ति को हर प्रकार से सुख , समृद्धि , यश  और मान सम्मान की प्राप्ति होती हे  |

1 ) शश योग - यह योग शनि देव द्वारा निर्मित होता हे  यदि कुंडली में शनि देव अपनी उच्च राशि तुला या अपनी ही राशि कुम्भ या मकर में हो और इसी के साथ केंद्र में स्थापित हो तो इस योग का निर्माण होता हे |  इस राजयोग से व्यक्ति सरकरी नौकरी या उच्च पद की प्राप्ति करता हे  |

2 ) रुचक योग - यह योग मंगल के द्वारा निर्मित होता  हे  यदि कुंडली  में मंगल देव अपनी उच्च राशि मकर में या अपनी ही राशि मेष या वृश्चिक में  हो और इसी के साथ केंद्र ( 1 ,4  ,7 ,10 ) में स्थापित हो तो रुचक योग का निर्माण होता हे। इस योग के बनने से व्यक्ति पराक्रमी और बलशाली बनता हे व्यक्ति हर वक़्त ऊर्जावान  महसूसकरता हे

3 ) भद्र योग - यह योग बुध देव के द्वारा निर्मित होता हे यदि कुंडली में बुध देव अपनी ही राशि मिथुन या कन्या में हो और साथ ही केंद्र में स्थापित हो तब भद्र योग का निर्माण होता हे इस योग के द्वारा जातक अपनी बुद्धि से बड़े से बड़े काम आसानी से कर लेता हे जातक बहुत बुद्धिमान होता हे  |

4 ) हंस योग - यह यह गुरु देव के द्वारा निर्मित होता हे यदि कुंडली में गुरु देव अपनी राशि धनु य मीन में हो या अपनी उच्च की राशि कर्क में स्थापित हो इसी के साथ केंद्र में (1 ,4 ,7 ,10  ) में बैठे हो तब हंस योग का निर्माण होता हे  |इस योग में जन्मे जातक शिक्षा के क्षेत्र में काफी आगे जाते हे ऐसे जातक काफी ज्ञानी होते हे  |

5 ) मालव्य योग - यह योग शुक्र देव के द्वारा निर्मित होता हे यदि कुंडली में शुक्र अपनी राशि तुला या वृषभ में हो या अपनी उच्च राशि मीन में हो इसी के साथ केंद्र में (१,४,७,१०) में स्थापित हो तब मालव्य योग का निर्माण होता हे इस योग में जन्मे जातक सूंदर और आकर्षण प्रिय होते हे ऐसे जातक ग्लेमर वाले क्षेत्र में उचाईया पाते हे 

अगर आप भी इस तरह किसी दोष से परेशांन  हो तो संपर्क करिये हमारे कालसर्प दो एवं मंगल दोष पूजा उज्जैन  विशेषज्ञ से